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Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 2 उसने कहा था

 

उसने कहा था (चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’) — सम्पूर्ण, समझने लायक नोट्स

कहानी का माहौल और संदर्भ

  • लेखक: चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ (1883–1922)
  • विधा: लघुकथा/कहानी (आधुनिक हिन्दी कहानी की पहली “श्रेष्ठ” कृति के रूप में प्रसिद्ध)
  • पृष्ठभूमि: प्रथम विश्वयुद्ध (फ्रांस–बेल्जियम मोर्चा), साथ ही अमृतसर/पंजाबी लोक-जीवन की नैसर्गिकता
  • शैली: सरल, संवादप्रधान, भावनात्मक, फ्लैशबैक (पूर्वस्मृति-शैली)

क्यों पढ़ें?

  • प्रेम, वचन, कर्तव्य और बलिदान—इन चार शब्दों का इतना सटीक, सधा हुआ, करुण मिलाप हिन्दी कहानी में कम ही मिलता है। अंत में “उसने कहा था” वाला वाक्य रगों में उतर जाता है।

कथासार—कहानी को जैसे फिल्म-सी आँखों के सामने रखिए

  1. चौक-बाज़ार, अमृतसर:
    बारह बरस का लड़का (लहना सिंह) और आठ बरस की लड़की (आगे चलकर “सूबेदारनी”) अपने-अपने मामा के घर आए हैं। बाज़ार में बार-बार टकराते हैं। लड़का मुस्कुराकर छेड़ता—“तेरी कुड़माई हो गई?” लड़की “धत्!” कहकर भाग जाती। एक दिन लड़की उल्टा जवाब दे देती—“हाँ, हो गई। कल। देखते नहीं, रेशम से कढ़ा सालू?” लहना सुनते ही अंदर तक हिल जाता—गुस्सा, खिन्नता, बेबसी; रास्ते भर छोटी-छोटी हरकतें कर बैठता है—जैसे मन का तूफ़ान बाहर छलक रहा हो।

  2. पच्चीस साल बाद, फौजी मोर्चा:
    लहना अब जमादार (77 सिख राइफल्स) है। छुट्टी के बीच ही लाम (युद्ध) की आज्ञा मिलती है। रास्ते में सूबेदार हजारा सिंह के घर रुकता है; वहीं सूबेदारनी आती है—लहना को देखते ही वही पुरानी पंक्ति गूंजती है—“तेरी कुड़माई हो गई?” और तुरंत एक बड़ी प्रार्थना: “मेरे मर्द (सूबेदार) और मेरे बेटे (बोधा सिंह) को सकुशल रखिए।” वह आँचल पसारकर मानो वचन माँगती है। लहना चुपचाप सिर झुका देता है—उसका वचन तय हो चुका है।

  3. पश्चिमी मोर्चा—हाड़ कंपा देने वाली ठंड, कीचड़, धुंध, गोलियाँ:
    “जाड़ा क्या—मौत है!” वजीरा सिंह का संवाद जैसे सच का बयान है। निमोनिया, भूख, गीले कपड़े—सब तरफ मौत का नामोनिशान।

  4. नकलची लेफ्टिनेंट वाली घटना:
    लहना चालाक है—“लपटन साहब” को ताड़ लेता है कि कुछ गड़बड़ है। धोखे से टुकड़ी को गलत दिशा में भेजना, सब जासूसी की चाल है। लहना भांडा फोड़ देता है—अपने लोगों को बचा लेता है।

  5. वचन की कीमत—अपना लहू:
    बोधा सिंह जो जवान है, बीमार और कमजोर भी। लहना अपना कम्बल-स्वेटर उसे दे देता है। एक भीषण हमले में जब बोधा बुरी तरह फँस जाता है, लहना अपनी जान पर खेलकर उसे बचा निकालता है; खुद घायल हो जाता है, पर कुछ भी नहीं जताता। जीत के बाद जब सूबेदार और बोधा एंबुलेंस में बैठते हैं, लहना धीरे से कहता है—“घर जाकर कह देना—मुझे जो ‘उसने कहा था’, वह मैंने कर दिया”। उधर मौत पास आती है—दिमाग में सारी पुरानी स्मृतियाँ “क्लिप” बनकर दौड़ती हैं। होंठ खुलते हैं—“उसने... कहा था...” और अख़बार में अगली सुबह खबर छपती है—जमादार लहना सिंह, शौर्य-पूर्वक शहीद।

संरचना: कहानी पाँच भागों में

  • 1: अमृतसर का बाल-प्रसंग (‘कुड़माई’, ‘सालू’)
  • 2: सेना में बुलावा, सूबेदार के घर मुलाकात—वचन
  • 3: मोर्चे की तैयारी, मौसम-बीमारी—पृष्ठभूमि
  • 4: जासूस/नकली लेफ्टिनेंट की चाल—लहना की सूझबूझ
  • 5: युद्ध, बलिदान, अंतिम स्मृतियाँ—शीर्षक अर्थपूर्ण

युद्ध का वर्णन किन भागों में? — द्वितीय (प्रस्थान-संदर्भ), तृतीय-चतुर्थ (मोरचे की स्थितियाँ/जासूस), पंचम (मुख्य युद्ध/बलिदान)

पात्र-परिचय (संक्षेप, पर ठोस)

  • लहना सिंह (नायक): बहादुर, चतुर, वचन-पालक, सच्चा प्रेमी; दिल में बचपन की स्मृति, वरना कर्तव्य ही कर्तव्य।
  • सूबेदारनी (लड़की): संयमी, विवेकशील; अपने पति-बेटे की रक्षा की “माँग” करती है; वही “उसने कहा था” का स्त्रोत।
  • सूबेदार हजारा सिंह: अनुशासित फौजी, लहना पर विश्वास।
  • बोधा सिंह: सूबेदार का बेटा; बीमार/कमजोर; लहना उसे बचाता है।
  • वजीरा/महासिंह/वजीरा सिंह: साथी; मोर्चे की सचाइयाँ बताते हैं (“जाड़ा क्या, मौत है...”)
  • “लपटन साहब” (नकली लेफ्टिनेंट): जासूस/भ्रम फैलाने वाला—लहना पकड़ लेता है।
  • कीरत सिंह: लहना का भतीजा (गाँव-प्रसंग)।

कहानी के बड़े विचार (थीम)

  • वचन और प्रेम: बचपन की एक मुलाकात—एक वाक्य—और पूरी ज़िन्दगी का फ़ैसला।
  • कर्तव्य और बलिदान: निजी प्रेम को कर्तव्य में रूपांतरित कर देना—यही नायकत्व है।
  • युद्ध-विरोधी स्वर: इतना बड़ा त्याग—पर युद्ध फिर भी “हँस कर” जीवन छीन लेता है।
  • स्मृति और पहचान: अंत-क्षण में जीवन “साफ” दिखाई देने लगता है; स्मृतियाँ जितनी निजी, उतनी सार्वभौमिक।

कथा-कौशल/कला-पक्ष

  • फ्लैशबैक: वर्तमान से अतीत की सहज, बिना झटके वाली यात्रा।
  • प्रतीक: “कुड़माई/सालू” (बंधन/वचन का संकेत), “आम का पेड़” (गाँव, अपनापा, भविष्य का सपना), “जाड़ा” (मौत का अहसास)।
  • संवाद: बिलकुल सधे हुए, खासकर पंजाबी-हिन्दी का लोक-रस।
  • क्लाइमैक्स: “उसने कहा था”—शीर्षक का गूढ़, मार्मिक अर्थ।

शीर्षक का औचित्य (क्यों सबसे सटीक?)

  • पूरी कहानी एक वाक्य के अर्थ-प्रसार पर टिकी है—वह “उसने कहा था”—यानी सूबेदारनी की विनती/आदेश/वचन। लहना का हर निर्णय उसी “कहा था” की डोरी से बंधा है। इसलिए यह शीर्षक—सबसे सटीक।

यह कहानी “पहली श्रेष्ठ कहानी” क्यों मानी जाती है?

  • नयी कथात्मकता, कसावट, जीवित संवाद, मानवीय करुणा, आधुनिक शिल्प, पाश्चात्य कथा-कौशल (फ्लैशबैक/क्लिप जैसी स्मृति), और उदात्त मानवीय मूल्य—इन्हीं खूबियों ने इसे “पहली श्रेष्ठ” का दर्जा दिलाया।

लेखक-परिचय (सरल, याद रखने लायक)

  • चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ (7 जुलाई 1883—12 सितम्बर 1922), मूलतः कांगड़ा (गुलेर), जन्म: जयपुर।
  • वृत्ति: अध्यापन/अनुसंधान; BHU में भी कार्य।
  • संपादन: ‘समालोचक’; काशी नागरी प्रचारिणी पत्रिका से भी जुड़े।
  • प्रमुख कहानियाँ: सुखमय जीवन (1911), बुद्ध का काँटा (1911), उसने कहा था (1915)।
  • विशेषता: कम लिखकर भी बहुत गहरा असर; भाषा-शैली में विद्वत्ता और लोक-रस का सुंदर मेल।

अति-लघु उत्तरीय (15)

  1. लेखक—चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
  2. कहानी की विधा—आधुनिक हिन्दी कहानी
  3. “उसने कहा था” को क्यों विशिष्ट माना?—पहली श्रेष्ठ/आधुनिक शिल्प, कसावट
  4. कहानी कितने भागों में?—5
  5. युद्ध-वर्णन किन भागों में?—2, 3, 4 (मुख्य युद्ध 5 में)
  6. नायक—लहना सिंह
  7. “कुड़माई” का अर्थ—सगाई
  8. “सालू”—रेशमी कढ़ाईवाला ओढ़ना/दुपट्टा
  9. सूबेदार—हजारा सिंह
  10. पुत्र—बोधा सिंह
  11. साथी—वजीरा/महासिंह आदि
  12. प्रसिद्ध पंक्ति—“जाड़ा क्या—मौत है...”
  13. लहना की पहचान—वचन-पालक/त्यागी
  14. अंत में कहा वाक्य—“उसने कहा था”
  15. कथा-तकनीक—फ्लैशबैक/संवादप्रधान

लघु उत्तरीय (12)

  1. “उसने कहा था”—कहानी का केन्द्रीय भाव
  • वचन, प्रेम, नैतिक कर्तव्य और त्याग; युद्ध-पीड़ा के बीच मानवीय संवेदना की विजय।
  1. लहना सिंह का चरित्र
  • साहसी, चतुर, दयालु (कम्बल-स्वेटर देना), वचन-निष्ठ—अंतिम सांस तक प्रतिज्ञा-पालन।
  1. सूबेदारनी की भूमिका
  • बचपन की “कुड़माई” प्रसंग से जो पहचान बनी, वही आगे जाकर वचन-माँग बनती है—और पूरी कथा उसी पर टिकी है।
  1. पश्चिमी मोर्चे के हाल
  • भीषण ठंड, निमोनिया, गीली खाइयाँ, अनिश्चित मौत; मानसिक-शारीरिक थकान की पराकाष्ठा।
  1. नकली “लपटन साहब” प्रसंग
  • जासूसी/भ्रम; लहना की सूझ-बूझ और नेतृत्व; दस्ता बचा।
  1. शीर्षक का औचित्य
  • कथा-तंत्र का केंद्र वही “कहा था”—इसीलिए शीर्षक सटीक।
  1. युद्ध-विरोधी स्वर
  • वीभत्स परिस्थितियाँ/नायकीय बलिदान के बावजूद—युद्ध की निरर्थकता झांकती है।
  1. “आम का पेड़” प्रतीक
  • गाँव, अपनापन, भविष्य का सपना; जो अंततः अधूरा रह गया—करुणा बढ़ाता है।
  1. संवाद की शक्ति
  • पंजाबी रंग, लोक-बोल, सहजता—चरित्रों को जीवित कर देते हैं।
  1. स्मृति का सिनेमाई प्रभाव
  • मृत्यु-क्षणों में जीवन “साफ” दिखना; पूरी कहानी का भाव-शिखर।
  1. “कुड़माई” वाला प्रसंग क्यों महत्वपूर्ण?
  • यहीं से भाव-बीज; आगे का “वचन” उसी की निरन्तरता।
  1. लहना का “दायित्व-बोध”
  • निजी भावना को कर्तव्य में बदल देना—यही नायकत्व।

दीर्घ उत्तरीय (6) — मॉडल उत्तर के बिंदु

  1. कथा-संरचना और फ्लैशबैक
  • 5 भाग; वर्तमान–अतीत–वर्तमान की आवागमन; climax पर “उसने कहा था” का अर्थ-प्रकाश।
  1. लहना सिंह—एक आदर्श नायक
  • वचन-निष्ठा, साहस, सूझ-बूझ, करुणा; निजी प्रेम का सार्वजनिक कर्तव्य में रूपांतरण।
  1. युद्ध का यथार्थ और मानवता
  • ठंड/निमोनिया/बम—इन सबके बीच मानवता का सबसे उजला चेहरा—लहना/साथियों का अपनापा।
  1. शीर्षक की सार्थकता
  • “उसने कहा था”—एक पंक्ति में पूरी कथा का दर्शन: स्मृति, वचन, प्रेम, बलिदान।
  1. प्रतीक और संवाद
  • “कुड़माई/सालू/आम का पेड़/जाड़ा”—बोलते हुए प्रतीक; लोक-भाषा वाले संवाद—जीवंत यथार्थ।
  1. क्यों यह “पहली श्रेष्ठ कहानी”
  • शिल्प की कसावट, आधुनिक तर्ज, भाव-गहनता, चरित्र की जीवंतता—हिन्दी कहानी का नया मुहावरा।

वस्तुनिष्ठ (MCQ — 20) — उत्तर अंत में

  1. ‘गुलेरी’ की कहानी कौन-सी?
    A) जूठन B) रोज़ C) उसने कहा था D) तिरिछ
  2. ‘गुलेरी’ का जन्म-वर्ष/तिथि?
    A) 7 जुलाई 1883 B) 10 मार्च 1980 C) 11 जनवरी 1805 D) 15 फरवरी 1875
  3. ‘गुलेरी’ की प्रमुख वृत्ति—
    A) व्यापार B) खेती C) अध्यापन D) सधुक्कड़ी
  4. किस पत्रिका का संपादन किया?
    A) गंगा B) माधुरी C) समन्वय D) समालोचक
  5. काशी नागरी प्रचारिणी पत्रिका में भूमिका—
    A) लेखक B) कवि C) संपादक D) संचालक
  6. कहानी कितने भागों में?
    A) 3 B) 4 C) 5 D) 6
  7. “कुड़माई” का अर्थ—
    A) विवाह B) सगाई C) मित्रता D) रिश्ता टूटना
  8. “सालू” क्या है?
    A) पगड़ी B) ओढ़नी/दुपट्टा C) कम्बल D) पाजेब
  9. “जाड़ा क्या है—मौत है”—यह किसका कथन?
    A) हजारा सिंह B) वजीरा सिंह C) बोधा सिंह D) लहना सिंह
  10. बोधा सिंह को किसने बचाया?
    A) हजारा सिंह B) सूबेदारनी C) लहना सिंह D) वजीरा
  11. नकली “लपटन साहब” क्या करता था?
    A) दवा बाँटता B) चिट्ठियाँ लिखता C) टुकड़ी भटकाता D) खाना पकाता
  12. अंत में लहना का अंतिम वाक्य—
    A) “मैं जीत गया” B) “मेरा गाँव” C) “उसने कहा था” D) “वाहेगुरु”
  13. कहानी का केन्द्रीय भाव—
    A) हास्य B) वचन-पालन/बलिदान C) प्रकृति-वर्णन D) नीति-प्रसंग
  14. “आम का पेड़” प्रतीक है—
    A) युद्ध B) धन C) गाँव/सपना D) बीमारी
  15. किस महीने का नाम पाठ में आता है?
    A) वैशाख B) आषाढ़ C) कार्तिक D) फाल्गुन
  16. “फ्लैशबैक” का हिन्दी पर्याय—
    A) अन्त्यानुप्रास B) पूर्वस्मृति-शैली C) निर्निमेष D) कथावाचक
  17. बोधा सिंह कौन?
    A) सूबेदार का बेटा B) जासूस C) अफसर D) मेम का पुत्र
  18. “राम-राम, यह भी कोई लड़ाई है”—यह वाक्य कैसा?
    A) उद्गार/आश्चर्य B) प्रश्न C) आज्ञा D) निषेध
  19. लहना ने किनको एंबुलेंस में बैठाया?
    A) सूबेदार और बोधा B) वजीरा और महासिंह C) जर्मन बंदी D) मेम-साहिब
  20. कहानी का समय-परिदृश्य—
    A) 1857 B) प्रथम विश्वयुद्ध C) द्वितीय विश्वयुद्ध D) अंग्रेज़-फ्रेंच युद्ध
    उत्तर: 1-C, 2-A, 3-C, 4-D, 5-C, 6-C, 7-B, 8-B, 9-B, 10-C, 11-C, 12-C, 13-B, 14-C, 15-C, 16-B, 17-A, 18-A, 19-A, 20-B

रिक्त स्थान (12)

  1. लहना सिंह के भतीजे का नाम — कीरत सिंह।
  2. “कहती है, तुम … हो, मेरे मुल्क को बचाने आए हो।” — राजा
  3. “कुछ दूर जाकर लड़के ने पूछा—तेरी … हो गई?” — कुड़माई
  4. “उसी … के बाग में मखमल की सी घास है।” — फिरंगी मेम
  5. “जाड़ा क्या—मौत है, और … से मरने वालों को मुरब्बे नहीं मिलते।” — निमोनिया
  6. “कल—देखते नहीं—यह रेशम से कढ़ा …” — सालू
  7. नकली “लपटन साहब” ने … फैलाया। — भ्रम
  8. “मैंने जो … किया था, वह निभा दिया।” — वचन
  9. बोधा सिंह को लहना ने … दिया। — कम्बल/जर्सी
  10. लहना का पद — जमादार (77 सिख राइफल्स)
  11. युद्ध-स्थल — फ्रांस/बेल्जियम का मोर्चा
  12. अंत में छपी खबर—लहना सिंह … से शहीद

सत्य/असत्य (10)

  1. “उसने कहा था” का नायक सूबेदार है। — असत्य (नायक: लहना)
  2. कहानी में पाँच भाग हैं। — सत्य
  3. “कुड़माई” का अर्थ विवाह है। — असत्य (सगाई)
  4. लहना ने बोधा सिंह की रक्षा की। — सत्य
  5. नकली “लपटन साहब” असल अफसर था। — असत्य
  6. कहानी में युद्ध-विरोधी स्वर भी है। — सत्य
  7. सूबेदारनी वही लड़की है जिसे बचपन में लहना जानता था। — सत्य
  8. लहना अन्त में घर लौट आता है। — असत्य
  9. कहानी में फ्लैशबैक तकनीक का प्रयोग है। — सत्य
  10. “उसने कहा था”—यह सूबेदारनी के वचन का संकेत है। — सत्य

मिलान कीजिए (10)
A) लहना सिंह — (i) वचन-निष्ठ/नायक
B) सूबेदारनी — (ii) “कुड़माई”/वचन का स्रोत
C) बोधा सिंह — (iii) सूबेदार का पुत्र
D) हजारा सिंह — (iv) सूबेदार
E) वजीरा — (v) साथी सैनिक
F) सालू — (vi) रेशमी ओढ़नी
G) जाड़ा — (vii) मौत-सा अहसास
H) आम का पेड़ — (viii) गाँव/सपना
I) लपटन साहब — (ix) नकली/जासूस
J) 77 सिख राइफल्स — (x) लहना की बटालियन

भाषा-अभ्यास

  1. शब्द से विशेषण बनाइए (वाक्य सहित)
  • जल → जलीय: मछली जलीय जीव है।
  • धर्म → धार्मिक: गाँधीजी धार्मिक प्रवृत्ति के थे।
  • नमक → नमकीन: समुद्र का पानी नमकीन होता है।
  • विलायत → विलायती: हजारा सिंह विलायती मोर्चे पर गया।
  • फौज → फौजी: सोहन फौजी है।
  • किताब → किताब़ी: वह किताब़ी ज्ञान में तेज है।
  1. समानार्थी शब्द
  • मुर्दा — शव/मृतक
  • लहू — रक्त/खून
  • घाव — जख्म/आघात
  • झूठ — असत्य/मिथ्या
  • चकमा — छल/धोखा
  • चिट्ठी — पत्र/पाती
  • घर — गृह/आलय
  • राजा — नृप/भूप
  • रचना — कृति/सृजन
  1. वाक्य-प्रकृति/भेद (संकेतात्मक)
  • “राम-राम, यह भी कोई लड़ाई है।” — उद्गार/आश्चर्य; मूल उपवाक्य सरल
  • “परसों ‘रिलीफ’ आ जाएगी और फिर सात दिन की छुट्टी।” — संयुक्त
  • “कहती है, तुम राजा हो, मेरे मुल्क को बचाने आए हो।” — संयुक्त (कथन + दो कथ्य)
  • “लड़की ‘धत्’ कहकर दौड़ गई और लड़का मुँह देखता रह गया।” — संयुक्त
  • “हाँ, देश क्या है—स्वर्ग है।” — सरल/वर्णनात्मक (आशयगत निष्कर्ष)
  • “मैं तो बुलेल की खड्ड के किनारे मरूंगा।” — सरल
  1. उत्पत्ति के आधार पर (पाठ्य-मान्य वर्गीकरण; कुछ शब्द संस्करणानुसार बदल सकते हैं)
  • आवाज — विदेशज
  • कयामत — विदेशज
  • आँसू — तद्भव
  • दही — तद्भव
  • बिजली — तद्भव
  • क्षयी — तत्सम
  • बेईमान — विदेशज
  • सोत — तद्भव
  • बावलियाँ — देशज
  • खाद — देशज
  • सिगड़ी — देशज
  • बादल — तद्भव

उद्धरण जो उत्तरों में चमक बढ़ा दें

  • “जाड़ा क्या है—मौत है, और निमोनिया से मरने वालों को मुरब्बे नहीं मिला करते।”
  • “कल—देखते नहीं—यह रेशम से कढ़ा सालू।”
  • “जब घर जाओ तो कह देना—मुझे जो उसने कहा था, वह मैंने कर दिया।”

टिप्स: 5 लाइन में बेहतरीन दीर्घ-उत्तर कैसे लिखें

  • पंक्ति 1: सीधा निष्कर्ष (थीसिस)
  • पंक्ति 2–3: पाठ-आधारित तर्क/उदाहरण
  • पंक्ति 4: एक उद्धरण/संवाद
  • पंक्ति 5: समापन—थीम/संदेश

छोटी सुधार-नोट

  • “फ्लैश बैंक” नहीं—“फ्लैशबैक” (पूर्वस्मृति-शैली)
  • “सूबेदारनी” वही बालिका है—कथा का भाव-बीज और समाधान एक ही धागे से बंधे हैं।
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